Friday, January 14, 2011

जन्मदिन

दिन बीतता है, रातें बीतती हैं. 
बसंत की परिणति हो जाती है बरसात के रूप में,
समय का पहिया घूमता है और घूमता ही चला जाता है,
बदलती जा रही हैं कैलेंडर की तारीखें अपनी निरंतरता लिए, 
परिवर्तन अच्छे के लिए ही होता है,
बुरे विचारों का बदलना अच्छा होता है व्यक्ति, समाज और देश के लिए.
परन्तु
अच्छे विचारों का बदल जाना दुखदायी होता है व्यक्ति, समाज और देश के लिए.
जन्मदिन आते हैं,  चले जाते हैं 
पर
अपने पीछे छोड़ जाती हैं कुछ यादें
जिसको संबल बना इन्सान
भविष्य के मंजिल तक की दूरी तय करने की सोचता है .
आने वाला कल एक नई मुस्कान और एक नया उमंग लेकर आये
और
राष्ट्र-जीवन को चंहु ओर से सुवाषित करता रहे सदैव.

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